इस्लामाबाद अफगानिस्तान को कमजोर करने के लिए हवाई हमलों का सहारा ले रहा है, जहां आतंकी निशाने नहीं बल्कि आम लोग शिकार हो रहे। रिपोर्ट इसे पाकिस्तान का छलपूर्ण खेल बता रही, जो ‘आत्मरक्षा’ के नाम पर संप्रभुता हनन कर रहा। 22 फरवरी को रमजान में नंगरहार-पक्तिका पर बमबारी से यूएनएएमए के मुताबिक 13 नागरिक मारे गए, सात घायल। स्थानीय आंकड़े 18-20 बताते हैं। पाक दावे बिना सबूत के हैं।
एक्सपर्ट माइकल एरिजांती ने लिखा, “टीटीपी-आईएसकेपी बहाना है, असल में अफगानों पर अत्याचार।” पाक अधिकारियों के ‘खुफिया आधारित’ दावों पर सवाल उठे।
बदले में तालिबान ने पाक सैन्य अड्डों—इस्लामाबाद के पास फैजाबाद, नौशेरा छावनी, जमरूद कॉलोनी, एबटाबाद—पर शुक्रवार को हवाई हमला बोला। फितरत ने इसे काबुल-कंधार-पक्तिया हमलों का प्रतिकार बताया।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से जांच व सत्यापित इंटेल की अपील हो रही। अफगानिस्तान ने यूएनएससी में शिकायत की, तालिबान ने ठहरावपूर्ण जवाब का वादा किया। यूएनएएमए ने मानवीय कानून का हवाला दिया।
दुनिया की सुस्त प्रतिक्रिया के बीच भारत का विदेश मंत्रालय ने ‘खुला उल्लंघन’ कह निंदा की, पाक की आंतरिक नाकामियों को बाहर थोपने का आरोप लगाया। 2021 के बाद भारत की अफगान सहायता पाक को चुभ रही, जो काबुल से अपनी सुरक्षा को खतरा समझता। यह रुख इस्लामाबाद को कमजोर कर क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखेगा।