भारत सरकार का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी तक 9.8 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो निर्धारित लक्ष्य का 63 प्रतिशत है। मंत्रालय के आंकड़े वित्तीय प्रबंधन की दक्षता को रेखांकित करते हैं।
इस期间 कुल आय 27.08 लाख करोड़ रुपये रही, जो संशोधित लक्ष्य का 79.5 प्रतिशत प्राप्त कर चुकी है। कर राजस्व (शुद्ध) 20.94 लाख करोड़, गैर-कर 5.57 लाख करोड़ तथा गैर-ऋण पूंजी 57,129 करोड़ रही। राज्यों को 11.39 लाख करोड़ की कर देवोल्यूशन दी गई, जो पिछले वर्ष से उल्लेखनीय रूप से अधिक है।
व्यय पक्ष पर 36.90 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें राजस्व मद 28.47 लाख करोड़ (ब्याज 9.88 लाख करोड़, सब्सिडी 3.54 लाख करोड़) और पूंजी मद 8.42 लाख करोड़ शामिल हैं। यह 74.3 प्रतिशत अनुमान है।
वित्त मंत्री ने अगले वर्ष घाटे को 4.3 प्रतिशत जीडीपी पर लाने की योजना बताई। 1 फरवरी के बजट में उन्होंने राजकोषीय विवेक को आर्थिक गति के साथ जोड़ने पर बल दिया।
ये आंकड़े भारत की मजबूत वित्तीय नीति को प्रमाणित करते हैं, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच स्थिरता प्रदान कर रही है।