बलूचिस्तान की धरती पर पाकिस्तानी सेना की बर्बरता थमने का नाम नहीं ले रही। बलूच यकजहीटी कमेटी ने गुरुवार को बताया कि नसराम बलूच और छात्र अवैस बलूच समेत दो निर्दोषों को सेना ने बेरहमी से चुन-चुनकर मारा। प्रांत में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं मानवता को शर्मसार कर रही हैं।
नसराम बलूच का शव मक्सीन नदी किनारे यातनाओं से चिथड़ा-चिथड़ा मिला। केच के बुलेडा से 12 अक्टूबर 2023 को अगवा हुए नसराम को परिवार की चीख-पुकार पर जून 2024 में छोड़ा गया। लेकिन यातनाओं ने उन्हें बीमार कर दिया। फिर 8 अगस्त को घर पर धावा बोलकर मां-बहन को लाठियां बरसाईं और उन्हें फिर गायब कर दिया।
दूसरी घटना में पांजगुर के छात्र अवैस को 23 फरवरी को घर से भगाया गया। 24 को उनका लाश अस्पताल में मिली। बीवाईसी ने चेतावनी दी कि यह सिलसिला रोकना जरूरी है, वरना बलूचिस्तान खून से लाल हो जाएगा। ‘रक्षक बनकर अपराध कर रहे हैं ये लोग,’ संगठन ने फरमान सुनाया।
संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक संस्थाओं से अपील की गई है कि पाकिस्तान के इन अपराधों की निष्पक्ष जांच हो। बलूचिस्तान के लोगों का संघर्ष न्याय की उम्मीद में जारी है, लेकिन समय तेजी से निकल रहा है। अंतरराष्ट्रीय समाज को जागना होगा।