दशकों पुराने विजया बैंक लोन घोटाले में सीबीआई को जयपुर अदालत से बड़ी जीत मिली है। एसीजेएम (एसपीई केस) ने 26 फरवरी 2026 को आलोक अग्रवाल को सात साल की सश्रम कारावास तथा पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा दी। 1997 का यह केस बैंक को 5 करोड़ के गबन का शिकार बना चुका था।
सीबीआई को 21 नवंबर 1997 को सूचना मिली, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज हुई। आरोपी बैंक अधिकारी एसआर लालवानी, एमआर शेट्टी के साथ फर्म के डायरेक्टर एसएस शर्मा व एसएम अग्रवाल ने मिलकर अपराधी षड्यंत्र रचा। उन्होंने काल्पनिक फर्मों में बिना वस्तु के व्यापार दिखाकर लोन लिया और रकम को कर्मचारियों के जरिए कैश में बदल लिया।
कुल 4,99,71,944 रुपये इस तरह डकार लिए गए। जांच के बाद 28 सितंबर 2001 को एसएम व अरुण अग्रवाल पर चार्जशीट तथा 3 अक्टूबर 2002 को आलोक पर पूरक चार्जशीट दाखिल हुई। मुकदमे के दौरान एसएम की मृत्यु से केस बंद, अरुण बरी। लेकिन आलोक को कोर्ट ने अपराधी सिद्ध कर सजा सुनाई।
यह फैसला वित्तीय संस्थानों में धांधली करने वालों के लिए सबक है। सीबीआई की अटल जांच ने न्याय सुनिश्चित किया, जो भविष्य के अपराधों को रोकने में सहायक होगा। बैंकिंग सिस्टम की मजबूती के लिए ऐसी कार्रवाइयां अनिवार्य हैं।