भगवान विष्णु के उग्र नृसिंह रूप को समर्पित नृसिंह द्वादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में द्वादशी को उत्साहपूर्वक मनाई जाती है। व्रतधारी भक्त शत्रुओं के नाश, संकटों के अंत और वैभवपूर्ण जीवन की प्रार्थना करते हैं। गोविंद द्वादशी के नाम से विख्यात यह व्रत गोविंद पूजन पर केंद्रित रहता है।
आज शनिवार को यह पर्व त्रिपुष्कर योग के साथ आ रहा है, जो ज्योतिषीय दृष्टि से पूजा, दान तथा मंगल कार्यों हेतु श्रेष्ठ माना जाता है। पंचांग गणना से द्वादशी 27 फरवरी रात 10:32 बजे आरंभ हो 28 फरवरी रात 8:43 बजे समाप्त होगी।
सूर्य का उदय 6:47 बजे तथा अस्त 6:20 बजे होगा। पुनर्वसु नक्षत्र 9:35 बजे तक, फिर पुष्य; सौभाग्य योग 5:02 बजे तक; बव करण 9:36 बजे तक उसके बाद बालव का राज रहेगा।
भक्तों के लिए शुभ अवसरों की भरमार है जिसमें ब्रह्म मुहूर्त 5:08-5:58, अभिजित 12:11-12:57, विजय 2:29-3:15, गोधूलि 6:18-6:43 बजे तथा अमृत काल 7:18-8:49 बजे सम्मिलित हैं। त्रिपुष्कर योग का सर्वोत्तम समय 6:47 से 9:35 बजे तक है।
इनका परहेज करें- राहुकाल 9:41-11:07, यमगंड 2:00-3:27, गुलिक 6:47-8:14 तथा दुर्मुहूर्त 6:47-7:34 बजे। इस दिव्य योग से परिपूर्ण नृसिंह द्वादशी पर सजग रहकर पूर्ण फल प्राप्त करें।