पाकिस्तान में इमरान खान के आंखों के इलाज को लेकर सियासी तकरार चरम पर है। पूर्व पीएम को 24 फरवरी को पीआईएमएस में दूसरी डोज मिली, जिसके बाद पीटीआई ने सरकार की चुप्पी पर निशाना साधा।
सीआरवीओ से जूझ रहे खान का पहला उपचार जनवरी में हुआ, लेकिन देरी से खुलासे ने विवाद खड़ा कर दिया। पीटीआई का कहना है कि पारदर्शिता गायब है, निजी चिकित्सकों को रोका जा रहा है और इलाज में लापरवाही बरती जा रही। सरकार सबूतों के साथ खारिज कर रही है।
डॉक्टरों का पैनल, हृदय विशेषज्ञों की जांच और अल-शिफा के सर्जनों की निगरानी में प्रक्रिया पूरी हुई। खान स्थिर रहे, डे-केयर के तौर पर छुट्टी मिली। लेकिन शिफा इंटरनेशनल की मांग पीटीआई की जुबान पर है।
मंत्री चौधरी के बयान—सुरक्षा, कानूनी पालन और मार्च का अगला इंजेक्शन—ने पार्टी को भड़का दिया। एक्स पर पीटीआई बोली, ‘रहस्य क्या छिपा रहा है? स्वतंत्र इलाज दो!’
यह सिलसिला सत्ता-विपक्ष के बीच अविश्वास को दिखाता है। खान का मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, राजनीतिक हथियार बन चुका है। खुलासा ही समाधान है।