भारत शुक्रवार को जीडीपी की नई श्रृंखला पेश करेगा, जिसमें आधार वर्ष 2022-23 होगा। यह कदम अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप को प्रतिबिंबित करेगा, जिसमें जीएसटी डेटा की बड़ी भूमिका होगी। मंत्रालय की समिति ने अनुमानों में इसके बढ़े उपयोग का सुझाव दिया है।
पुराने 2011-12 आधार से संक्रमण हो रहा है, जो सेवा क्षेत्र, डिजिटल कारोबार और असंगठित हिस्से को सटीक आंकड़े देगा। वाहन पंजीकरण और गैस खपत जैसे आधुनिक स्रोत जोड़े जा रहे हैं।
विकास पूर्वानुमान सकारात्मक हैं। 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की वृद्धि घरेलू खपत से संभव है। एसबीआई के अनुसार, अगले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 8 से 8.1 प्रतिशत रह सकता है। चालू तिमाही के आंकड़े भी उत्साहजनक हैं।
यूनियन बैंक 8.3 प्रतिशत की संभावना बता रहा है। शुक्रवार को दूसरे अग्रिम अनुमान, पिछले तीन वर्षों के आंकड़े और त्रैमासिक डेटा जारी होंगे।
वैश्विक बाधाओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था की लचीलापन साफ दिख रहा है। नई पद्धति से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और विकास की कहानी मजबूत होगी।