देश के ताजा जीडीपी पूर्वानुमानों ने अर्थशास्त्रियों को प्रभावित कर दिया है। इन्हें ‘संतुलित और विश्वसनीय’ बताते हुए विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक क्षमता की तारीफ की है। वैश्विक मंदी के दौर में यह सकारात्मक संदेश है।
अमेरिका के साथ ट्रेड समझौते की उम्मीदें निवेश के नए द्वार खोल रही हैं। जानकारों का अनुमान है कि इससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में भारी उछाल आएगा। ‘ये आंकड़े सुधारों का फल हैं,’ अर्थशास्त्री प्रिया शर्मा ने कहा।
पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत की विकास दर दर्ज हुई। निजी खपत, स्टार्टअप इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ा है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान ने आयात निर्भरता घटी है। आरबीआई की नीतियां जोखिमों पर नजर रख रही हैं।
डील में 50 अरब डॉलर के सामानों पर टैरिफ कम होंगे, जिससे वस्त्र, रत्न और आईटी को फायदा। इससे लाखों नौकरियां सृजित होंगी।
शेयर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर हैं, जो निवेशकों के भरोसे को दिखाता है।
कुल मिलाकर, जीडीपी अनुमान और यूएस डील भारत को वैश्विक निवेश का केंद्र बनाएंगे। आर्थिक उड़ान भरने को तैयार है देश।