रायपुर में नक्सलियों के समर्पण की एक बड़ी मिसाल बनी जब 120 पूर्व उग्रवादियों ने विधानसभा का दौरा किया। झीरम नरसंहार से जुड़े ये लोग सदन की कार्यवाही से रूबरू हुए, जो उनके जीवन के पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इनमें रुपेश जैसे एक करोड़ के इनामी और चैतू जैसे 25 लाख वाले शामिल थे। जगदलपुर में हाल ही में हथियार डालने के बाद वे पहली बार लोकतंत्र की ऐसी नजदीकी महसूस कर रहे थे।
सीएम विष्णुदेव साय ने अपील की कि वे हिंसा छोड़ पूर्ण रूप से समाज का हिस्सा बनें। उन्होंने बेहतर अवसरों का वायदा किया। बहसें, प्रश्न और राजनीतिक हलचल देखकर वे प्रभावित हुए।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नवा रायपुर आवास पर अनौपचारिक भोज का आयोजन किया। फूलमालाओं से स्वागत, भोजन के साथ गपशप और निजी बातें—सबने विश्वास जगाया। शर्मा ने उनकी व्यथा सुनी, रायपुर जीवन की सलाह दी।
सुरक्षा जांच के बाद उत्साहपूर्ण प्रवेश हुआ। यह आयोजन छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्ति अभियान में नरमी और एकीकरण की नई रणनीति को रेखांकित करता है। शांति की राह प्रशस्त हो रही है।