गांधीनगर में गुजरात विधानसभा परिसर में राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन की राज्य संगोष्ठी ने प्राकृतिक खेती को मिट्टी, पानी, पर्यावरण व स्वास्थ्य रक्षक घोषित किया। राज्यपाल आचार्य देवव्रत की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में सीएम भूपेंद्र पटेल, स्पीकर शंकर चौधरी व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा शामिल हुए।
संगोष्ठी से पूर्व प्राकृतिक कृषि मेले के स्टालों का दौरा किया गया। राज्यपाल ने प्रतिभागियों से कहा कि प्राकृतिक खेती ही मिट्टी-जल व स्वास्थ्य की एकमात्र गारंटी है। विधानसभा द्वारा इसे स्थान देना सराहनीय है।
उन्होंने जैविक खेती की तुलना में प्राकृतिक खेती को बेहतर बताया, जहां जैविक में 300 क्विंटल गोबर चाहिए वहीं प्राकृतिक सूक्ष्मजीवों पर निर्भर। एक ग्राम देसी गोबर में 300 करोड़ जीवाणु, गौमूत्र खनिजों से भरपूर।
जीवामृत जैसे मिश्रणों से मिट्टी में केंचुए व कीटों की संख्या बढ़ती है, उपजाऊ शक्ति जागृत होती है।
स्वास्थ्य संकट पर कहा कि कैंसर जैसी बीमारियां अब आम, बच्चों तक पहुंचीं। अध्ययन बताते हैं कि स्तन दूध में भी विषाक्त पदार्थ मौजूद।
मिट्टी का कार्बनिक पदार्थ 2.5% से घटकर 0.5% से कम, बंजरता का संकट। गुजरात की रासायनिक खेतों में मिट्टी सख्त, जल संरक्षण नामुमकिन। प्राकृतिक खेती केंचुओं द्वारा जलाधार बनाती है।
यह परिवर्तन अपनाकर हम देश को हरित व स्वस्थ बना सकते हैं, राज्यपाल ने आग्रह किया।