उत्तर प्रदेश का वाराणसी हिंदू धर्म का आध्यात्मिक केंद्र है। गंगा के पावन घाट, विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग और दैनिक आरती इस शहर को अमर बनाती हैं। बनारसी साड़ी, पान और सांस्कृतिक धरोहरें इसे विश्व पटल पर चमकाती हैं। हजारों मंदिरों से सुसज्जित काशी में सोमेश्वर महादेव मंदिर एक ऐसा रत्न है जो अब विनाश की ओर अग्रसर है।
काशी के मध्य में बसा यह लगभग 1000 वर्ष पुराना शिव मंदिर कभी भक्तों का प्रमुख आकर्षण था। महादेव भक्त यहां तपस्या और ध्यान के लिए आते थे। वर्तमान में मंदिर की दशा दयनीय है—दीवारें टूटी, छत ढहने को तैयार और पहुंच मार्ग जर्जर।
मंदिर परिसर में श्वेत संगमरमर शिवलिंग के आगे नंदी जी की मूर्ति है। विशेष आकर्षण है हनुमान जी की वह अनोखी मूर्ति जिसमें राम-लक्ष्मण उनके कंधों पर हैं। स्कंद पुराण में सोमेश्वर का वर्णन इसकी महत्ता दर्शाता है।
काशी के इस प्राचीन गौरव को समय की मार झेलनी पड़ रही है। संरक्षण के अभाव में यह धरोहर लुप्त होने की कगार पर है। सरकार, पुरातत्व विभाग और स्थानीय निवासियों को मिलकर पुनर्निर्माण का कार्य आरंभ करना चाहिए। अन्यथा आने वाली पीढ़ियां इसकी झलक तक न पा सकेंगी। काशी का यह मंदिर सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग है, जिसे बचाना हमारा कर्तव्य है।