पेरावूर, कन्नूर। राहुल गांधी ने गुरुवार को किसान सभा में केंद्र की खुली आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिका के दबाव में व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय किसानों के हितों को दांव पर लगा रही है।
करशका संगमम में हजारों किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था का आधार छोटे किसान हैं। अमेरिकी मशीनीकृत कृषि उत्पाद बाजार में आने से ये किसान प्रतिस्पर्धा में हार जाएंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।
नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों को निशाने पर लेते हुए गांधी ने वायनाड के अनुभव साझा किए। ऊंचे इलाकों में पशु-मानव संघर्ष को गंभीर समस्या बताते हुए उन्होंने समग्र नीति, तकनीकी समाधान व प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षा कवच की मांग की।
चुनावी माहौल में उन्होंने यूपीडीएफ घोषणापत्र के लिए किसानों से सुझाव मांगे। वादों में न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि, कोल्ड स्टोरेज का जाल बिछाना व बाजार मंदी या फसल क्षति पर फौरन आर्थिक मदद शामिल है।
विपक्ष नेता ने जोर देकर कहा कि भविष्य की राजनीति तय करेगी कि फैसले बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पक्ष में होंगे या देश के लाखों किसानों के, जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। भाषण के बाद किसानों में उत्साह का संचार हुआ।