चंद्रशेखर आजाद – नाम ही काफी है क्रांति की ज्वाला जगाने को। 27 फरवरी को उनकी पुण्यतिथि पर स्मरण करते हैं उस वीर का, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को खौफजदा कर दिया।
भाबरा में 1906 का जन्म। अल्पायु में अंग्रेज अफसर पर पत्थर, फिर गांधीजी के आंदोलन में भागीदारी। गिरफ्तार होकर अदालत में डंका बजाया – मैं आजाद हूं। कोड़े खाए, पर नारा लगाया भारत माता की जय।
चौरी-चौरा ने बदल दिया नजरिया। हिंसक क्रांति का मार्ग अपनाया। युवाओं को संगठित किया, HSRA बनाया। काकोरी ट्रेन डकैती से धन जुटाया।
पुलिस के जाल से बार-बार बच निकले। लेकिन 1931 में मुखबिर ने धोखा दिया। अल्फ्रेड पार्क में मुठभेड़। साथी भागे, आजाद लड़े। अंत में स्वगोली से प्रण निभाया।
उनकी शायरी में क्रांति की गूंज: चिंगारी आजादी की सुलग रही। आज भी उनके बलिदान की याद दिलाती है कि सच्ची आजादी कुर्बानी से मिली।