रवींद्र जैन की संगीतमय यात्रा प्रेरणा की मिसाल है, खासकर जब बात राज कपूर के साथ जुड़ने की हो। सालों की जद्दोजहद के बाद ‘राम तेरी गंगा मैली’ ने उन्हें शोहरत दी।
1944 में अलीगढ़ जन्मे जैन को पिता ने संगीत की बारीकियां सिखाईं। रेडियो रिजेक्शन के बाद 1969 में झुनझुनवाला जी के साथ मुंबई पहुंचे। ‘लोरी’ (1971) में रफी का पहला गीत ‘ये सिलसिला…’ रिकॉर्ड हुआ, लता-आशा के गाने भी बने।
‘कांच और हीरा’ (1972) पहली रिलीज, रफी का ‘नजर आती नहीं…’ हिट। ‘सौदागर’, ‘चोर मचाए शोर’, ‘तपस्या’, ‘प्रतिशोध’ आदि में सफलता। राज कपूर से बार-बार संपर्क, लेकिन इंतजार।
पुणे पार्टी में ‘सुन साहिबा सुन’ ने जादू बिखेरा। कपूर बोले, ‘बस, यही वाला ‘राम तेरी गंगा मैली’ के लिए।’ फिल्म के गाने सुपरहिट, फिल्मफेयर अवॉर्ड जैन के नाम।
संघर्ष से सफलता तक का यह सफर बॉलीवुड की सच्ची कहानी है।