फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि पर उज्जैन महाकालेश्वर धाम में सोमवार सुबह भस्म आरती ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात से सज्जनों की भीड़ उमड़ी, बाबा के चार बजे जागने का इंतजार किया।
मंदिर के द्वार वीरभद्र ने खोले, पंचामृत अभिषेक के बाद भस्म व शृंगार किया गया। माथे पर अर्धचंद्राकार मोती बिंदी, त्रिपुंड, भांग-मेवों से सजा बाबा का रूप शांति बिखेर गया। पूरा परिसर ‘जय श्री महाकाल’ नारों से vibrated।
दैनिक भस्म आरती निराकार दर्शन से मोक्ष का वरदान देती है, साकार रूप भव्यता प्रदान करता है। तिथि अनुसार शृंगार बदलते हैं, विशेष पर्वों पर आरतियां बढ़ जाती हैं, प्रसाद भक्तों को मिलता है।
श्रद्धालु इस दिव्य दर्शन से भावविभोर हो लौटे, महाकाल की महिमा का गुणगान करते हुए। उज्जैन की यह परंपरा भक्ति की अनुपम मिसाल है।