इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत पर आज महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। प्रयागराज के इस यौन शोषण कांड ने धार्मिक जगत को हिलाकर रख दिया है। दो नाबालिगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर से बचने को स्वामी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में यह केस कोर्ट 72 की नई लिस्ट में 142 नंबर पर है। यूपी सरकार समेत शिकायतकर्ता आशुतोष पांडेय, पीड़ित नाबालिग, लीगल सर्विस कमेटी और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी पक्षकार हैं। वकील राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार व श्री प्रकाश ने याचिका दाखिल की।
झूंसी पुलिस ने स्वामी व शिष्य पर बीएनएस धारा 351(3) व अन्य छह धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के अनुसार, आश्रम में 14-17 साल के लड़कों का लंबे समय से शारीरिक शोषण होता रहा। माघ मेला में पीड़ितों ने राज खोला।
शिकायत में कहा गया कि महाकुंभ 2025 व आगामी माघ मेला 2026 में भी अपराध हुए। ‘गुरु सेवा’ के नाम पर लालच दिया गया। नग्न सोने, धमकी और रात्रिकालीन शोषण की घटनाएं बताई गईं। मेला स्थल पर कार व कैंप में ताजा कृत्य भी दर्ज।
जमानत अस्वीकृति पर गिरफ्तारी तय है। यह प्रकरण आश्रमों की पोल खोल रहा है, जहां नाबालिग असुरक्षित हैं। सुनवाई का परिणाम नया मोड़ ला सकता है, जो धार्मिक नेतृत्व की जवाबदेही तय करेगा। समाज को सतर्क रहने की जरूरत है।