राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश में दूध में घातक मिलावट का मामला सुर्खियों में है। पांच मौतों के बावजूद 15 लोग अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। सरकारी बुलेटिन गुरुवार को जारी हुआ, जिसमें विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया का जिक्र है। स्थिति अब स्थिर है।
22 फरवरी को किम्स अस्पताल से अलर्ट मिला—कई बुजुर्गों को किडनी की भयानक समस्या। जांच ने दूध को दोषी ठहराया। कोरुकोंडा के नरसापुरम में वरलक्ष्मी डेयरी के 106 परिवार प्रभावित। वहां से दूध, पनीर, घी, पानी व सिरके के सैंपल लैब भेजे गए।
घर-घर सर्वे में 307 लोगों की स्क्रीनिंग हुई। 957 परिवारों का पंचायत स्तर पर चेकअप। ब्लड, यूरिन नमूने नेफ्रॉन टॉक्सिन टेस्ट के लिए तिरुपति भेजे। चार पशु चिकित्सकों ने 41 दूध व चारा नमूने वीबीआरआई विजयवाड़ा भेजे।
इलाजरत मरीजों में एक वेंटिलेटर पर, बाकी डायलिसिस पर। मृतकों में बच्चा व वृद्ध शामिल। आरोपी दूध विक्रेता गणेश्वरराव हिरासत में। फॉरेंसिक, महामारी व नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ सक्रिय। खाद्य अधिकारीयों ने डेयरी सील की।
वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर डेरा डाले हैं। लैब रिपोर्ट्स से मिलेगी आगे की दिशा। यह घटना ग्रामीण डेयरी व्यवस्था की पोल खोलती है, जहां सख्त निगरानी की दरकार है।