गर्मी की मार झेल रहे भारत के लिए आईआईटी दिल्ली एक नई उम्मीद लेकर आया है – एक ऐसा स्मार्ट एयर कंडीशनर जो बिजली की बचत में माहिर है। लैब में टेस्टिंग के दौर से गुजर रहा यह प्रोटोटाइप सामान्य एसी से एक तिहाई कम ऊर्जा इस्तेमाल करेगा।
पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि एसी के बढ़ते उपयोग से कूलिंग डिमांड 2038 तक तिगुनी हो जाएगी। इससे बिजली संसाधनों पर दबाव और उपभोक्ताओं के खर्चे बढ़ेंगे। आईआईटी के शोधकर्ताओं ने इस समस्या का समाधान ढूंढ लिया है।
पुरानी तकनीक में नमी हटाने के लिए हवा को ओवरकूल किया जाता है, जबकि यह नई व्यवस्था नमक घोल और विशेष झिल्ली से नमी को प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित करती है। घोल को रिजनरेट करने के लिए कोई अलग उपकरण नहीं, बल्कि यूनिट की निकास गर्मी का ही सदुपयोग होता है।
प्रो. अनुराग गोयल और उनकी टीम के अनुसार, सामान्य 1200 वॉट की जगह 800 वॉट में ही पूरा कमरा ठंडा रहता है। पीएचडी शोधार्थी अनंतकृष्णन के सहयोग से विकसित यह तकनीक भारतीय भवनों के लिए आदर्श है। बिल्डिंग इंजीनियरिंग जर्नल में छपी रिपोर्ट सस्टेनेबल कूलिंग का भविष्य रेखांकित करती है।