रक्षा खरीद बोर्ड के इस बड़े फैसले से भारतीय हवाई क्षेत्र में नया दौर शुरू हो गया है। 114 राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी मिलने से 2.5 लाख करोड़ रुपये का सौदा पक्का हो गया।
वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या घट रही थी, जिसकी भरपाई यह सौदा करेगा। राफेल की बहुउद्देशीय क्षमताएं हवा से हवा और हवा से जमीन हमलों के लिए बेजोड़ हैं।
भारतीय कंपनियों को 70-80 प्रतिशत ऑफसेट मिलेंगे, जिससे एचएएल, टाटा और रिलायंस जैसे समूह शामिल होंगे। स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
विमानों में मेटियोर मिसाइलें, स्कैल्प क्रूज मिसाइलें और हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले जैसी सुविधाएं होंगी। चीन और पाकिस्तान की बढ़ती ताकत के बीच यह समयानुकूल है।
यह खरीद तत्काल जरूरतों के साथ औद्योगिक विकास को जोड़ेगी। अनुबंध पर दस्तखत होने से भारत हवाई वर्चस्व की ओर अग्रसर होगा।