केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर को देश की सभ्यतागत निरंतरता और अडिग संकल्प का प्रतीक करार दिया। मंदिर परिसर में विशेष अनुष्ठान के दौरान दिए गए भाषण में उन्होंने इसके ऐतिहासिक संघर्षों को भावुक अंदाज में बयान किया।
प्रभावशाली सोमनाथ धाम को कई बार लूटा और तोड़ा गया—महमूद गजनवी का आक्रमण इसका कुख्यात उदाहरण है। फिर भी, राजाओं, संतों और आम जनता की एकजुटता से यह बार-बार खड़ा हुआ। स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1951 में इसका भव्य पुनर्निर्माण कराया, जो राष्ट्र निर्माण का प्रतीक बना।
‘यह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति की अमिट छाप है,’ शाह ने जोर देकर कहा। उन्होंने आक्रमणों के बावजूद भारतीयों की दृढ़ता का जिक्र कर युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित किया।
वर्तमान में केंद्र सरकार के निवेश से मंदिर में आधुनिक सुविधाएं, संग्रहालय और बेहतर पहुंच मार्ग बने हैं। शाह ने इसे ‘विकसित भारत’ अभियान से जोड़ा, जहां अतीत संरक्षण भविष्य की नींव है। अन्य मंदिर परियोजनाओं का भी उल्लेख किया।
समारोह में भक्तों की भारी भीड़ जुटी। शाह का संदेश देशभर में गूंजा, जो हमारी सांस्कृतिक एकता को मजबूत करता है। अंत में उन्होंने कहा, ‘सोमनाथ की कहानी भारत की कहानी है—हमेशा विजयी रहने की।’