न्यूयॉर्क, 8 मार्च। यूएन महासभा अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने हंसा मेहता को याद करते हुए कहा कि उनकी मानवाधिकारों के लिए लड़ाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरे से महिलाओं को बचाने में प्रेरणास्रोत बनी हुई है।
मेहता ने 1948-49 में मानवाधिकार आयोग में ‘सभी पुरुषों’ की जगह ‘सभी मनुष्यों’ का शब्द प्रयोग करवाकर महिलाओं के लिए समानता का द्वार खोला। यह छोटा-सा परिवर्तन वैश्विक स्तर पर बड़ा असर डाल गया।
भारत मिशन द्वारा आयोजित स्मृति व्याख्यान में बेयरबॉक ने कहा, ‘एआई नियम बनाते समय हमें मेहता जैसा अडिग रहना चाहिए।’ विषय था मेहता के जीवन से बाधाएं तोड़ना।
उन्होंने उजागर किया कि डिजिटल तकनीक महिलाओं को पीछे धकेल रही है। बिना सहमति डीपफेक पोर्न का 96 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं पर केंद्रित है।
भारत का एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन समावेशी प्रगति का उदाहरण है। बेयरबॉक बोलीं, ‘एक इंसान ने इतना बदला, समूची दुनिया मिलकर क्या नहीं कर सकती।’ मेहता संविधान निर्माण की प्रमुख महिला सदस्य थीं।