रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने पाकिस्तान में अफगान पत्रकारों के साथ हो रही बेरहमी पर कड़ा एक्शन लेने की मांग की है। पेरिस से जारी बयान में संगठन ने कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव को अफगान शरणार्थियों पर अत्याचार का हथियार बनाया जा रहा है।
27 फरवरी को पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान पर ‘खुली जंग’ घोषित करने के बाद निर्वासित अफगान पत्रकारों पर कार्रवाई तेज हो गई। आरएसएफ ने खुलासा किया कि कई पत्रकारों को पकड़ा गया और देश से बाहर करने की धमकी दी जा रही है।
2026 की शुरुआत से करीब 20 गिरफ्तारियां दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें पिछले हफ्ते के मामले शामिल हैं। 15 दिनों में छह आरएसएफ समर्थित पत्रकारों को जबरन वापस भेजा गया, जनवरी से कुल नौ हो गए।
जमीन पर हालात खराब हैं। एक पत्रकार ने कहा, ‘फरवरी 27 से पुलिस बार-बार हमारे इलाके में अफगानों पर छापेमारी कर रही है।’ पाकिस्तानी सेना पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं, जहां रिहाई के लिए मोटी रकम ऐंठी जा रही है।
एक हिरासत में लिए गए पत्रकार ने बताया, ‘पूरे दिन थाने में बिताने के बाद 1,15,000 रुपये देकर डिपोर्टेशन से बचा। फिर मकान मालिक ने घर खाली करने को कहा।’ ये सभी तालिबान की सेंसरशिप से तंग आकर पाकिस्तान शरण लेने आए थे।
आरएसएफ दक्षिण एशिया प्रमुख सेलिया मर्सियर ने इसे बदला बताया। ‘तालिबान से भागे पत्रकारों को गिरफ्तार कर वापस भेजना उनकी जान जोखिम में डालना है। पाकिस्तान को तत्काल कार्रवाई बंद करनी चाहिए, सुरक्षा देनी चाहिए और नॉन-रिफ्यूलमेंट का सम्मान करना चाहिए।’
2023 से चली आ रही शरणार्थी निकासी नीति तालिबान से तनाव के चलते और कठोर हो गई है। आरएसएफ की चेतावनी अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने में अहम साबित हो सकती है।