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    Home»World»श्रीलंका में बौद्ध कूटनीति के बहाने चीन की वैचारिक चालबाजी
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    श्रीलंका में बौद्ध कूटनीति के बहाने चीन की वैचारिक चालबाजी

    Indian SamacharBy Indian SamacharMarch 5, 20262 Mins Read
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    बौद्ध
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    श्रीलंका पर चीन का बौद्ध कूटनीति का जाल इतना जटिल हो चुका है कि देश की धार्मिक नींवें खिसकने लगी हैं। सीलोन वायर न्यूज की गुरुवार जारी रिपोर्ट ने पर्दाफाश किया है कि मंदिर निर्माण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नाम पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी श्रीलंका की बौद्ध संस्थाओं पर कब्जा जमाने की साजिश रच रही है। आर्थिक दबावों के बीच सांस्कृतिक संरक्षण को दांव पर लगाने का समय नहीं है।

    बौद्ध धर्म की पवित्र भूमि श्रीलंका अब वैचारिक हस्तक्षेप का शिकार हो रहा है। चीन तीर्थयात्राओं का खर्च उठा रहा है, भिक्षुओं के बीच पुल बना रहा है और खुद को धार्मिक संरक्षक के रूप में प्रचारित कर रहा है। लेकिन रिपोर्ट खुलासा करती है कि यह सब सीसीपी के वैश्विक एजेंडे को आगे बढ़ाने का साधन है।

    विद्वानों का कहना है कि बौद्ध कूटनीति केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि राजनीतिक हथियार है जो पार्टी-दर-पार्टी संबंधों को पुख्ता करती है। कर्ज के जाल में फंसे श्रीलंका को हंबनटोटा जैसे प्रोजेक्ट्स के बदले जमीन और नियंत्रण सौंपना पड़ा। हालिया डिजिटल समझौते चीनी निवेश के जरिए शासन में कम्युनिस्ट विचारधारा घुसेड़ रहे हैं।

    ‘सामूहिक समृद्धि’ और अनुशासन के नारों से लिपटी आर्थिक मदद श्रीलंका की नीतियों को बदल रही है। साथ ही बौद्ध शिक्षाओं को चीनी मॉडल के अनुरूप ढाला जा रहा है। यह दोहरी निर्भरता देश की स्वतंत्रता को खोखला कर रही है और सांस्कृतिक पहचान को नया आकार दे रही है।

    यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो प्राचीन बौद्ध परंपराएं खत्म हो सकती हैं। मंदिर विदेशी एजेंडे के पिट्ठू बन जाएंगे। श्रीलंका को अपनी आध्यात्मिक धरोहर को बचाने के लिए निर्णायक रुख अपनाना पड़ेगा।

    Buddhist Diplomacy CCP Influence China Sri Lanka Cultural Manipulation Hambantota Port Ideological Infiltration Soft Power Strategy Theravada Buddhism
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