दुनिया ने द्वितीय विश्व युद्ध उपरांत शांति की ओर अग्रसरता दिखाई, मगर अब आधुनिक युग में मध्ययुगीन हिंसा की वापसी हो रही है। अमेरिका-इजरायल का 28 फरवरी का ईरान पर हमला इसका प्रमाण है।
सुप्रीम लीडर अयातुल्ला रूहोल्लाह मुसावी खोमैनी समेत शीर्ष सैन्य नेता मारे गए। छोटे राष्ट्र चिंतित हैं कि नीति भिन्नता पर अमेरिकी प्रहार झेलना पड़ सकता है।
वॉशिंगटन ने ईरान के न्यूक्लियर प्लान, मिसाइलों और सत्ता को निशाना बनाया। ट्रंप बोले, ईरान हथियार बनाने को तैयार था, जो अस्वीकार्य था। कूटनीतिक प्रयास नाकाम रहे।
आतंकवाद का खतरा बढ़ेगा। अमेरिका लोकतंत्र निर्यातक कहलाता है, परंतु हस्तक्षेप अराजकता फैलाते हैं। ट्रंप काल ने अंतरराष्ट्रीय संतुलन बिगाड़ दिया।
भविष्य में संघर्ष संभावित। देशों को एकजुट होकर स्थिरता बहाल करने की जरूरत है।