अमेरिकी पेंटागन ने ईरान विरोधी युद्ध में एआई आधारित ड्रोन और स्वायत्त सिस्टम के इस्तेमाल को कबूल किया। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की बुधवार को हुई ब्रिफिंग में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसकी पुष्टि की।
उन्होंने गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा कि कई ऐसी प्रणालियां हैं जिनमें उन्नत एआई तकनीक है। यह खुलासा युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती ताकत को रेखांकित करता है, खासकर हवाई निगरानी और लक्ष्य निर्धारण में।
अभियान में लॉन्ग रेंज स्ट्राइक, समुद्री अभियान और एकदम सटीक हवाई हमले हो रहे हैं ताकि ईरान की फौज को नेस्तनाबूद किया जाए। चीफ ऑफ जॉइंट स्टाफ जनरल डैन केन के अनुसार, शुरुआती दौर में 2,000 से अधिक ठिकानों को ध्वस्त किया गया।
मुख्य उद्देश्य स्पष्ट हैं: बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता खत्म करना, ईरानी नौसेना को पंगु बनाना और उनकी त्वरित बहाली रोकना। केन ने कहा, ‘पहला मिसाइलें, दूसरा नौसेना, तीसरा पुनर्निर्माण पर रोक।’
सेंटकॉम अब दूरगामी हमलों से हटकर ईरान पर सीधे प्रहार कर रहा है। नतीजे साफ हैं—ईरानी मिसाइल फायरिंग में 86 फीसदी की कमी। लेकिन अमेरिकी कमांडर सतर्क हैं: ‘संघर्ष खतरनाक और अनिश्चित बना हुआ है।’
इस हफ्ते शुरू हुए एपिक फ्यूरी ने मिसाइल युद्ध और न्यूक्लियर तनाव से मध्य पूर्व को आग के आगोश में धकेल दिया। एआई के इस नए अध्याय से वैश्विक सुरक्षा पर सवाल उठे हैं।