ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में मंगलवार को कनाडा प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मध्य पूर्वी संकट को अंतरराष्ट्रीय तंत्र की असफलता का आईना बताया। अपने विदेशी दौर के दौरान प्रेस से मुखातिब होते हुए उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर वर्षों की विफल कूटनीति का जिक्र किया।
उनके मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों, परमाणु एजेंसी की जांच और प्रतिबंधों का कोई असर नहीं पड़ा। यह स्थिति वैश्विक संस्थाओं की कमजोरियों को उजागर करती है।
ईरान को मिडिल ईस्ट में अशांति का प्रमुख दोषी ठहराते हुए कार्नी ने उसके कारनामों से हुई भारी क्षति का हवाला दिया। सैकड़ों जानें गईं, कनाडाई शामिल, लाखों ने दर्द सही।
ईरान को हथियारों से रोके जाने के प्रयासों में कनाडा साथ है, लेकिन यूएस-इजरायल की एकतरफा कार्रवाई पर सवाल उठाए। संयुक्त राष्ट्र या सहयोगियों से बात किए बिना कदम उठाना गलत है।
सभी पक्ष अंतरराष्ट्रीय नियम मानें, उन्होंने आग्रह किया। ईरान के आम लोगों पर हमलों की भर्त्सना की और संयम की पुकार लगाई। कनाडा तनाव कम करने में मदद को तैयार।
डिप्लोमेसी से ही रास्ता निकलेगा। बेगुनाहों की हिफाजत और न्यूक्लियर-आतंकी खतरे खत्म करने के लिए मजबूत करार आवश्यक। ईरानी साइट्स पर हालिया हमलों ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है।