दुनिया के तनावपूर्ण हालात में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर नया मोड़ ला दिया। न्यूयॉर्क पोस्ट को उन्होंने कहा, ‘जरूरत पड़ी तो ईरान में अमेरिकी फौज उतार सकते हैं।’ पिछले वादों को नकारते हुए उन्होंने जोर दिया, ‘मैं “जमीन पर कोई सैनिक नहीं” वाला डायलॉग नहीं दोहराता।’
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने कमाल कर दिखाया। शनिवार शुरू हुए अभियान में चार हफ्ते का लक्ष्य एक दिन में हासिल। 49 ईरानी नेता ढेर, अयातुल्लाह खामेनेई सहित। सोमवार के इंटरव्यू में ट्रंप बोले, ‘बहुत तेजी से आगे, शीघ्र समाप्ति।’
सेंट्रल कमांड के अनुसार सोमवार तक चार अमेरिकी जवान शहीद। घोषणा वीडियो में ट्रंप ने कहा था, ‘ईरान हत्या चाहता है। हमारे नायक खो सकते हैं।’
चार-पांच हफ्तों का अनुमान है, लेकिन ट्रंप लंबे संघर्ष के लिए तैयार। इजरायल के यूएन प्रतिनिधि ने कहा, ‘समय जितना लगे।’
अमेरिकी जनता सशंकित। रॉयटर्स पोल में 27% समर्थन, 43% असहमत। ट्रंप ने कहा, ‘सर्वे की चिंता नहीं। सही रास्ता चुनूंगा। लोग असलियत से प्रभावित हैं।’ साइलेंट मेजॉरिटी पर दांव।
फ्यूरी ऑपरेशन की जीत और सैन्य विस्तार की आशंका के बीच ट्रंप का रुख निर्णायक साबित होगा।