अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियारों से दूर रखने के लिए 74 बार कड़ा संदेश दिया, जो हालिया सैन्य हमले का आधार बना। व्हाइट हाउस ने सोमवार को 2011 से उनके बयानों का संकलन साझा किया, जो दृढ़ नीति को रेखांकित करता है।
शब्द बदलते रहे, मकसद वही। 24 फरवरी 2026 को ‘मिडनाइट हैमर’ के बाद चेताया कि हथियार कार्यक्रम न शुरू करें, वरना दुनिया का नंबर एक आतंकी प्रायोजक न्युक्लियर नहीं पाएगा। 19 फरवरी: परमाणु हथियार मध्य पूर्व शांति के दुश्मन। 13 फरवरी: संवर्धन बर्दाश्त नहीं।
संक्षिप्त बयान भी असरदार—9 फरवरी का ‘कोई न्यूक्लियर नहीं’, 6 फरवरी और 29 जनवरी को दोहराया। 25 जून 2025 में 15 साल की निरंतरता का जिक्र। 3 नवंबर 2024 को वैश्विक खतरे की बात। 7 अक्टूबर: सिर्फ एक शर्त—न्यूक्लियर नहीं।
27 अगस्त 2024 को इजरायल को नुकसान का आगाह। पुराने उदाहरण: 6 जनवरी 2020 का चिल्लाया संदेश, 22 जून 2019 और 2011 का प्रारंभिक विरोध। विभिन्न मंचों पर अमेरिका का रुख ईरान के न्यूक्लियर सपनों को कुचलने का रहा।
यूरेनियम संवर्धन पर विवाद, आर्थिक पाबंदियां और अंतरराष्ट्रीय निगरानी ने पश्चिम एशिया को उबाला रखा। ट्रंप की चेतावनियां अब कार्रवाई में बदल चुकी हैं, जो क्षेत्रीय समीकरण बदल सकती हैं।