अमेरिका से नेपाली सड़कों तक रैप ने सामाजिक परिवर्तन की लहर चलाई है। झापा में अब यह धारा बालेन शाह के लिए उफान पर है। 35 वर्षीय इस जेन-जी चेहरे को प्रधानमंत्री बनाने के लिए रैपर्स ने कमर कसी है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के इस उम्मीदवार का मुकाबला पांच मार्च के चुनावों में झापा-5 में है।
ओली सरकार के सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ पिछले साल के प्रदर्शनों ने आधार तैयार किया। रैपर्स की धमाकेदार प्रस्तुतियों ने युवाओं को एकजुट किया, दमन के खिलाफ बगावत को हवा दी। बालेन शाह इस आंदोलन के प्रतीक बने।
समर्थन सिर्फ पार्टी का नहीं, युवा आइकन का है। दमक के राजेश भंडारी (34) और प्रभात बस्नेत (24) जैसे रैपर इसमें जुटे हैं। भारत सीमा से लगे झापा के ये कलाकार संगीत और सोशल मीडिया से सक्रिय हैं।
भंडारी 15 वर्षों से राजनीति-समाज पर रैप रचते हैं, हार्डवेयर दुकान से शौक पूरा करते हैं। ‘संगीत से विरोध व्यक्त करते और जोड़ते हैं,’ उनका मानना। बालेन को पुराने दोस्त मानते हुए कहते हैं, 40-45 सालों की पार्टियों ने देश बर्बाद किया।
हालिया एल्बम बालेन के गानों पर केंद्रित है- पूर्ण समर्थन। बचपन के रैप सरकार को कष्टों पर ताने मारते थे। नेपाल से बाहर सिलीगुड़ी ही देखा, युवाओं के सपनों पर सोग जताया।
बस्नेत अभियान में समन्वयक हैं। रैप आसान प्रेरणा देता है। प्रदर्शनों में हमने शांति बनाए रखी। बालेन के पास विकास की रूपरेखा, काठमांडू को उन्होंने चमकाया।
भंडारी ने मेयर काल की प्रशासनिक सफलता गिनाई। यह रैप एकजुटता नेपाल में नई पीढ़ी की सत्ता की दहलीज पर दस्तक दे रही है। परिणाम क्या होंगे?