पाकिस्तान के संसदीय सत्र में ड्रामा तब चरम पर पहुंचा जब राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी भारत विरोधी बयानबाजी कर रहे थे। सोमवार को नौवें संबोधन में उन्हें अपने ही सांसदों ने ‘गो जरदारी गो’ और ‘इमरान खान को आजाद करो’ के नारों से घेर लिया।
शांति की बात से शुरू कर जरदारी ने विदेशी ताकतों को पड़ोस का दुरुपयोग न करने की चेतावनी दी। भारत-अफगानिस्तान को थोड़ी सी ताकत दिखाने का दंभ भरा और परमाणु राष्ट्र होने का जोर देकर बचाव की क्षमता बताई।
विपक्ष ने हालांकि इमरान खान की रिहाई और ट्रंप के गाजा पीस बोर्ड से हटने की मांग की। फिलिस्तीन समर्थन में पाकिस्तानी अवाम का गुस्सा इस भागीदारी पर फूट पड़ा, जिसे ‘नकली बोर्ड’ कहा गया।
देश के भीतर चुनौतियां बढ़ रही हैं, अफगानिस्तान सीमा पर तनाव और ईरान नीति अनिश्चित। संसद में यह तमाशा जरदारी सरकार की कमजोरी दिखाता है, जहां आंतरिक कलह बाहरी दुश्मनी पर भारी पड़ रहा है।