प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ फोन पर लंबी बातचीत की। उन्होंने यूएई पर हाल के घातक हमलों का पुरजोर विरोध जताया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भारत ने इस संकटपूर्ण दौर में यूएई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का वादा किया।
एक्स पर पोस्ट में पीएम ने कहा, ‘राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से बात हुई। हमलों की निंदा की, शोक संदेश भेजे और भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए धन्यवाद दिया। क्षेत्र में शांति के लिए भारत प्रतिबद्ध है।’
यूएई प्राधिकार द्वारा भारतीय प्रवासियों की चिंता के लिए मोदी ने सराहना की। भारत-यूएई साझेदारी व्यापारिक उछाल, तेल आयात, सैन्य गठबंधन, उग्रवाद विरोध और एनआरआई मुद्दों पर आधारित है। यहां का विशाल भारतीय वर्ग संबंधों को और सशक्त बनाता है।
देर शाम नई दिल्ली में पीएम ने सीसीएस की उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। पश्चिमी एशिया के तनावपूर्ण परिदृश्य—यूएस-इजरायल के ईरान हमलों एवं खामेनेई की मौत की खबरों—के बीच यह जरूरी था।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, एस जयशंकर, निर्मला सीतारमण, अजीत डोभाल एवं विक्रम मिसरी बैठक में शरीक हुए। गुजरात-तमिलनाडु आदि दौरे से 9:30 बजे पहुंचे मोदी ने तत्काल रणनीति पर विचार किया।
सीसीएस राष्ट्र की सुरक्षा कवच है। यह घटनाक्रम भारत की कूटनीतिक सक्रियता और आंतरिक सतर्कता का प्रतीक है, जो मध्यपूर्व अस्थिरता से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने को तैयार है।