पूर्व इजरायली पीएम नफ्ताली बेनेट का कहना है कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान से वहां का तानाशाही शासन कमजोर पड़ रहा है। 1 मार्च को वॉशिंगटन से फॉक्स न्यूज पर बोलते हुए उन्होंने आईआरजीसी की दुर्दशा का जिक्र किया, जो ईरानी लोगों के लिए नई उम्मीद जगा सकता है।
साक्षात्कार में बेनेट ने बताया कि पहले नेतृत्व को नेस्तनाबूद किया गया। अब वायु रक्षा भेदने के बाद सुरक्षा का पूरा जाल बिखरने वाला है। ‘कमांड केंद्रों पर वार से तंत्र की कमर टूट गई,’ उन्होंने कहा। दमन की जंजीरें ढीली हो रही हैं—ईरानी खुद इन्हें तोड़ेंगे।
शासन बदलना मकसद नहीं। ‘आत्मरक्षा ही उद्देश्य, जो खतरा सिर पर मंडरा रहा था उसे रोका,’ बेनेट ने स्पष्ट किया। वरना ईरान मिसाइलों का भंडार, न्यूक्लियर क्षमता हासिल कर इजरायल व पश्चिम को निशाना बनाता।
आईआरजीसी की ताकत चूर-चूर। ‘एक माह पहले वाली नहीं रही, कमांडर व प्रमुख नेता समाप्त,’ उनका आकलन। अंदरूनी हलचल का समय अज्ञात—सोवियत जैसे भ्रष्ट शासन का अंत अचानक होता है।
ईरान की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षा व हथियारबंद गुटों का साथ इजरायल के लिए बड़ा खतरा। बेनेट के बयान क्षेत्रीय समीकरण बदलने के संकेत देते हैं।