अमेरिका-इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत वैश्विक मंच पर भूकंप ला रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शासन परिवर्तन के सपने अधूरे रहेंगे, जबकि आर्थिक अस्थिरता बढ़ेगी।
शिया शासन के 46 साल के इस अंतिम अध्याय ने मध्य पूर्व को युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया। तेहरान की प्रतिक्रिया से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की नौबत आ गई, दुबई की अर्थव्यवस्था चरमरा गई।
वीना सिकरी ने चेताया, ‘यह आर्थिक तबाही का संकेत है। जिनेवा में ओमान की वार्ता अच्छी चल रही थी, ईरान नरम पड़ा था, फिर भी इजरायल ने साजिश रची।’ केपी फैबियन ने हमले को खुफिया जीत बताया, लेकिन राजनीतिक बदलाव पर संदेह जताया।
खामेनेई के घर को नेस्तनाबूद करने वाली इस कार्रवाई में उनके परिवार के सदस्य भी मारे गए। महेश कुमार सचदेव ने उनके लंबे कार्यकाल को रेखांकित किया—यथार्थवादी नीतियां अपनाते हुए धार्मिक श्रेष्ठता कायम रखी, प्रॉक्सी ताकतों को बढ़ावा दिया, आंतरिक संतुलन साधा।
उनकी सफलता निर्विवाद रही, भले आलोचनाओं का शिकार हुए। अब तेल बाजार हिल गए हैं, शेयर बाजार लुढ़क रहे हैं। यह संकट वैश्विक व्यापार, मुद्रास्फीति और सुरक्षा को लंबे समय तक प्रभावित करेगा, जिसकी गूंज दूर तक सुनी जाएगी।