अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में ‘प्रमुख युद्ध अभियान’ की घोषणा कर दी। ईरानी फौजों से कहा, ‘अपने हथियार समर्पण कर दो या मौत को गले लगाओ।’ जनता को संदेश दिया, ‘स्वतंत्रता का दौर शुरू हो चुका है।’ नागरिकों को घरों में कैद रहने को कहा गया।
‘बाहर न निकलें, बमबारी का खतरा है। सुरक्षित रहने के लिए घर ही सबसे बेहतर है,’ ट्रंप ने आगाह किया। अमेरिकी सेना ने पहले ही ईरान में भारी हमले किए हैं, ताकि अमेरिकियों को बचाया जाए और तात्कालिक धमकियां दूर हों। ईरान को अमेरिका-मित्रों के लिए खतरा बताया।
47 बरसों की शत्रुता का इतिहास गिनाया—1979 तेहरान दूतावास कब्जा, 1983 बेरूत धमाका। ईरान को शीर्ष आतंकी फंडर करार दिया और न्यूक्लियर हथियार से महरूम रखने की कसम खाई। जून के ऑपरेशन मिडनाइट हैमर ने फोर्डो, नतान्ज, इस्फहान को उड़ा दिया।
ईरान ने परमाणु मंसूबों को छोड़ने से इनकार किया। अब मिसाइल व नौसैनिक ठिकानों पर हमले होंगे। ट्रंप ने सैनिक हताहतों की संभावना जताई। यह मिडिल ईस्ट में अमेरिका का अबतक का सबसे बड़ा दांव है।
भारत की ईरान से पुरानी सांस्कृतिक जड़ें हैं, अमेरिका से बढ़ती साझेदारी। लंबे जंग से तेल सप्लाई, इलाकाई शांति और पश्चिम एशिया के करोड़ों भारतीयों पर असर पड़ेगा।