पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर लगातार गोलीबारी से जानें जा रही हैं, स्थिति युद्ध जैसी हो चुकी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में हस्तक्षेप से साफ मना कर दिया। उल्टा उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीफ मार्शल असिम मुनीर को शाबाशी दी।
प्रेस से बात करते हुए ट्रंप बोले, ‘आपके पास बेहतरीन नेता हैं। मैं इनका बहुत आदर करता हूं। पाकिस्तान सब सही कर रहा है।’ यह बयान पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के अफगानिस्तान से जंग की धमकी के बाद आया, जो तनाव बढ़ने पर दिया गया।
स्टेट डिपार्टमेंट ने भी पाकिस्तान का साथ दिया। प्रवक्ता ने कहा, ‘तालिबान आतंकवाद रोकने के वादे तोड़ रहा है। अफगानिस्तान से हमले हो रहे हैं, पाकिस्तान का बचाव जायज है।’ अमेरिका का यह रवैया उसके अफगान इतिहास से जुड़ा है।
2001 के 9/11 हमलों में अलकायदा ने 3000 से ज्यादा अमेरिकियों की हत्या की। तालिबान ने बिन लादेन न सौंपा तो बुश ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया। 20 साल बाद 2021 में वापसी हुई, तालिबान सत्ता में लौट आया। अब ट्रंप हस्तक्षेप से दूर।
ट्रंप का यह रुख अमेरिकी नीति में बदलाव दिखाता है। पाकिस्तान के नेतृत्व को मजबूत बताते हुए उन्होंने जिम्मेदारी सौंपी। बॉर्डर पर शांति कैसे आएगी, यह पाकिस्तान के हाथ में है। वैश्विक नजरें इस पर टिकी हैं।