देश के केंद्रीय बैंक बांग्लादेश बैंक में अराजकता ने सिर उठा लिया है। इस हफ्ते अनुभवी गवर्नर अहसान एच मंसूर को पद से हटा दिया गया। उसी दिन वरिष्ठ सलाहकार अहसान उल्लाह पर अधिकारियों ने हमला बोला और उन्हें जबरन मुख्यालय से बाहर फेंक दिया।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि 30 से अधिक कर्मचारियों का जत्था, अतिरिक्त निदेशक तौहीदुल इस्लाम के नेतृत्व में आगे बढ़ा। इसमें कार्यकारी निदेशक सरवर हुसैन, निदेशक नौशाद मुस्तफा, अतिरिक्त निदेशक तनवीर अहमद जैसे बड़े नाम थे। नारे लगे, धक्के मारे गए और गाड़ी में धकेल दिया गया।
ढाका ट्रिब्यून ने इसे शर्मनाक बताया। मंसूर के सुधार—दुर्बल बैंकों का एकीकरण, निगरानी मजबूत करना, डिफॉल्टर्स पर शिकंजा—जरूरी थे लेकिन स्वार्थी तत्वों को चुभ गए। प्रेस वार्ता के बाद हटाना सुनियोजित लगता है।
ऐसी घटना से संस्था की गरिमा को ठेस पहुंची है। वित्तीय स्थिरता की जिम्मेदार संस्था में गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं। सरकार को जांच करवानी चाहिए, अनुशासन कायम करना चाहिए। नीतियां उन लोगों के हाथों में न जाएं जो पारदर्शिता से भागते हैं।
बैंकिंग सिस्टम संकट में है, भरोसा बहाल करना जरूरी। यह वाकया सुधारों को पटरी से उतार सकता है। तत्काल कार्रवाई से ही स्थिति संभाली जा सकती है।