इजरायल में पीएम मोदी का भव्य स्वागत और समझौतों ने भारत-इजरायल संबंधों को अभेद्य बना दिया। हथियार विकास पर नए एमओयू, जिसमें आयरन डोम शामिल है, ने पाकिस्तान को सदमे में डाल दिया। नेतन्याहू का क्षेत्रीय गठबंधन आइडिया तो बस आग में घी का काम कर गया।
पाक सीनेट ने तुरंत प्रस्ताव लाकर इजरायल पर मुस्लिम देशों को अलग करने का इल्जाम लगाया। टीवी चैनलों पर बहस छिड़ गई, जहां पूर्व राजनयिकों ने इसे पाक-चीन के खिलाफ साजिश बताया।
याद कीजिए कारगिल: इजरायली तकनीक से लैस भारतीय विमानों ने दुश्मन को धूल चटा दी। बालाकोट में लोइटरिंग मुनिशन और गाइडेड हथियारों ने आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया। हेरॉन जैसे ड्रोन लंबे समय से भारत की ढाल बने हैं।
इस सहयोग से पाकिस्तान पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ साफ कहते हैं- यही डर नेतन्याहू विरोध का कारण है। भारत के अधिकारी हंसते हैं- पाक रक्षा बंधनों की आलोचना करता है लेकिन आतंकी हमलों को बढ़ावा देता है।
भारत-रूस-इजरायल जैसे साझेदार अस्थिरता से बचाव के लिए हैं, हमले के लिए नहीं। मोदी के दौरे से इजरायल भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार बन गया। पाकिस्तान की बेचैनी मिडिल ईस्ट के नए समीकरणों से उपजी है, लेकिन नई दिल्ली बार-बार दोहराती है- ये रिश्ते शांति और सुरक्षा के हित में हैं।