यूरोप को लगा था नेपोलियन का अंत हो गया, लेकिन 26 फरवरी 1815 को एल्बा से उनकी विदाई ने सबको चौंका दिया। फ्रांस लौटकर उन्होंने 100 दिनों का नया अध्याय लिखा।
1814 की हार के बाद लुई 18 राजा बने, पर नया शासन जनविरोधी साबित हुआ। सेना और आम लोगों को नेपोलियन याद थे। एल्बा पर वे Europe’s खेल देख रहे थे।
अस्थिरता का फायदा उठाते हुए नेपोलियन 1000 सैनिकों के साथ रवाना हुए। 1 मार्च गोल्फ-जुआं में उतरकर पेरिस पहुंचे। शाही सैनिकों ने हथियार डाल दिए। उनका प्रसिद्ध वाक्य—’सिपाही, अपने सम्राट को गोली मारने का साहस हो तो मारो’—ने युद्ध टाल दिया।
20 मार्च को पेरिस में विजयी प्रवेश। हंड्रेड डेज में सुधार किए, सेना तैयार की। लेकिन वॉटरलू (18 जून) में प्रूसियन-ब्रिटिश सेनाओं से हार गए। सेंट हेलेना भेजे गए, 1821 में स्वर्गवासी।
नेपोलियन का यह साहसिक कदम इतिहास में सत्ता संग्राम की मिसाल है, जिसने यूरोप की राजनीति को हिला दिया।