अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर ने दो गौरवपूर्ण वर्ष पूरे किए। महंत स्वामी महाराज द्वारा उद्घाटित यह स्थल आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया है। 100+ देशों से 40 लाख से अधिक लोग इसे निहार चुके हैं।
आठ हजार से अधिक लोगों वाले वर्षगांठ समारोह का थीम था ‘मंदिर: हमारा परिवार, हमारा भविष्य।’ मंदिर परिवारों को जोड़ने, संस्कृतियों को मिश्रित करने का माध्यम है।
स्वामी ब्रह्मविहारीदासजी के उद्बोधन में उपमा दी- ‘दो वर्षीय बालक की भांति मंदिर बोल पड़ा है- सद्भाव का उपदेश देकर।’ यह संदेश सभी को छू गया।
यूएई के शेख नहयान का सम्मानित किया गया। उन्होंने मंदिर को भारत-यूएई संबंधों का आईना बताया और भावी मार्गदर्शन की कामना की।
संवाद सत्रों में मंदिर के सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला। परिवार इसे सेवा का केंद्र मानते हैं। बालकों ने सकारात्मकता, पर्यावरण आदि के संकल्प लिए।
यह मंदिर सभ्यता संवाद का जीवंत उदाहरण है। आस्था, सेवा से विश्व शांति को बल मिलता है।
नए वर्ष में यह एकता का संदेश प्रसारित करता रहेगा।