एक विचारोत्तेजक रिपोर्ट ने पाकिस्तान को इस्लामी कट्टरता का प्रतीक और तुर्की को उसके बढ़ते समर्थक के रूप में उजागर किया। स्वतंत्रता के सात दशक बीतने पर भी पाकिस्तान अविश्वसनीय बना रहा, जबकि तुर्की के उग्रवादी रुख से वैश्विक चिंता गहरी हो गई।
बांग्लादेश में राजनीतिक हलचल को पाकिस्तान ने चुपचाप बढ़ावा दिया, 2024 छात्र विद्रोह को समर्थन देकर दो साल की अस्थिरता पैदा की। 2026 चुनावों से राहत मिली, मगर भारत-विरोधी भावनाओं को भड़काने की पाक साजिशें स्पष्ट हैं।
कश्मीर आतंक से लेकर बांग्लादेश तक पाकिस्तान का हाथ साफ दिखा। खाड़ी देशों व चीन के सहारे यह भारत के खिलाफ छद्म युद्ध लड़ता है। रिपोर्ट ने इसे ‘विषैली खंजर’ करार दिया।
अलगाववाद और भारत के मुस्लिमों पर असर डालने की कोशिशें पाक-तुर्की-कतर गठजोड़ की देन हैं। भारत को सलाह दी गई कि तुर्की के छात्रवृत्ति जाल के जवाब में कुर्द युवाओं को शरण देकर तुर्की के अधिनायकवाद का मुकाबला करे।
पाकिस्तान जिन्ना के सपनों से भटक गया। तुर्की के कट्टर पंथ को रोकने के लिए भारत को नेतृत्व करना होगा, ताकि धार्मिक विभाजन रुके।