पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में उग्रवादियों और सेना के खूनी संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी। रिपोर्ट कहती है, यह तनाव पुराना है, पाक फौज की क्रूरता और दबाव की राजनीति का नतीजा।
यूरेशिया रिव्यू का आलेख इसे पाक राज्य की संरचनात्मक खामियों से जोड़ता है। सैन्य हस्तक्षेप से राजनीति विकृत होती है, जो देश को तबाह कर देती।
सरकार विदेशी हस्तक्षेप का आरोप लगाती है, स्थानीय इसे केंद्रीय शोषण का फल मानते। लंबी उपेक्षा, अधिकारों का हनन, खनिजों का लूट ने आग लगाई।
क्षेत्र आर्थिक रूप से कमजोर लगे, लेकिन CPEC से चीनी धन, अमेरिकी खनन निवेश की उम्मीद। तांबा, सोना आदि संसाधन पुनरुत्थान की कुंजी।
सुरक्षा घेराबंदी विफल; हमलों से सैन्य समाधान की पोल खुली। महत्वपूर्ण लोकेशन: समुद्र पहुंच, पड़ोसी देश, चीन का मार्ग।
प्रदर्शन बढ़े। असीम मुनीर के नेतृत्व में संबंध खराब, ठहराव।
2019 के बाद नुकसान कम दिखाए। गायब लोग, फर्जी एनकाउंटर, सामूहिक गिरफ्तें अनसुलझी।
सुरक्षा चश्मा पहनकर राजनीति नजरअंदाज। आंदोलनों पर दमन।
निष्कर्ष: बलूचिस्तान पाक के लिए खतरा।