पाकिस्तान की आर्थिक मंदी का मूल कारण उसकी राजनीतिक खामियां हैं, जहां भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन हावी हैं। डॉन अखबार के एक लेख ने साफ लफ्जों में कहा है कि राजनीति दुरुस्त किए बिना आर्थिक सुधार सपना ही रहेंगे।
पूर्व सलाहकार साकिब शेरानी ने तर्क दिया कि राजनीतिक व्यवस्था सर्वोच्च है और उसकी कमियां आर्थिक क्षेत्र को खोखला कर रही हैं। आर्थिक सुधारों की बातें बिना राजनीतिक जवाबदेही के व्यर्थ हैं।
वर्तमान एलीट-केंद्रित सिस्टम रेंट-सीकिंग पर चलता है, जो नवाचार और दक्षता वाले निवेश को नामुमकिन बनाता है। शेरानी ने उद्योगों की ‘क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन’ वाली थ्योरी को नकारा।
औपचारिक कंपनियां सबसे महंगी बिजली, भारी करभार (सुपर टैक्स समेत), ओवरवैल्यूड करेंसी, तस्करी और 68 अरब डॉलर की समांतर इकॉनमी से पीड़ित हैं। कार्यपालिका का दखल, रेगुलेटरी जाल, भ्रष्टाचार की कीमतें, ट्रेनिंग खर्च, अपराधी वसूली और नीति परिवर्तन परेशान कर रहे हैं।
इन बाधाओं के बीच कंपनियों को दोष देना गलत है। राजनीतिक स्तर पर व्यापक सुधार ही अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगे और प्रतिस्पर्धी क्षमता लाएंगे।
शेरानी का संदेश स्पष्ट है—राजनीतिक इमानदारी ही आर्थिक पुनरुद्धार की कुंजी है।