म्यूनिख। डेनमार्क की नेता मेटे फ्रेडरिक्सन ने म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर अटल इच्छा पर मुहर लगा दी। शनिवार को पैनल में बोलते हुए उन्होंने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति इस मसले पर पूरी तरह संजीदा हैं। उनका द्वीप हासिल करने का इरादा आज भी कायम है।”
उन्होंने ग्रीनलैंड की स्वायत्तता का बचाव किया। “स्वतंत्र इलाकों और वहां के लोगों के फैसले के हक की हिफाजत जरूरी है। ग्रीनलैंडवासी स्पष्ट कह चुके हैं कि वे अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेंगे।” यह बयान डेनमार्क की मजबूत स्थिति को रेखांकित करता है।
अमेरिकी आर्कटिक सुरक्षा हितों के लिए तीन देशों का वर्किंग ग्रुप बनाया गया है। फ्रेडरिक्सन ने शुक्रवार को टिप्पणी की थी, “वर्किंग ग्रुप अच्छा कदम है। समाधान निकालने की कोशिश करेंगे, लेकिन लक्ष्मण रेखाएं पार नहीं होंगी। हमारी रणनीति वही रहेगी।”
दावोस सम्मेलन में ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई से इनकार किया था, जिसने तनाव कम किया। नाटो प्रमुख मार्क रूटे से बातचीत के बाद उन्होंने आठ यूरोपीय देशों पर 10-25 प्रतिशत टैरिफ की धमकी भी समाप्त कर दी। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वशासित क्षेत्र है, रक्षा मामलों में कोपेनहेगन का दबदबा।
ट्रंप के 2025 सत्ता अभियान ने इसे बारंबार उठाया, यूरोप में भारी विरोध के बावजूद। संसाधनों से भरपूर यह द्वीप भू-राजनीतिक दौड़ का केंद्र है। फ्रेडरिक्सन का ऐलान डेनमार्क की सतर्कता दिखाता है।