अफ्रीकन यूनियन के शीर्ष सम्मेलन में एयूसी प्रमुख मूसा फकी महमात ने अफ्रीका की शांति पर गंभीर सवाल उठाए। अदीस अबाबा में 39वें सत्र के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि महाद्वीप में हथियारबंद संघर्षों को रोकना अभूतपूर्व चुनौती है।
वैश्विक अशांति के दौर में अफ्रीकी देशों की आंतरिक कमजोरियां समस्या बढ़ा रही हैं। संस्थागत खामियां विवादों को दीर्घकालिक बना रही, जबकि गैर-संवैधानिक बदलाव पुराने घाव कुरेद रहे।
सूडान, डीआर कांगो के पूर्वी भाग और सोमालिया में जारी अस्थिरता लाखों जिंदगियां तबाह कर रही। महमात ने अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के अफ्रीका पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों को रेखांकित किया।
बहुपक्षीय व्यवस्था पर एकतरफा दबाव बढ़ रहा। ऐसे में अफ्रीका को एकजुट होकर अपने ढांचे को सशक्त बनाना पड़ेगा। ग्लोबल साउथ में अपनी विशिष्ट स्थिति बनाए रखते हुए एकीकरण कार्यक्रमों में तेजी लाएं।
एजेंडा 2063 के जरिए स्वावलंबी, समृद्ध अफ्रीका का निर्माण संभव। पैन-अफ्रीकी संस्थाओं को इरादा पक्का कर प्रयास तेज करें। इथियोपिया के प्रधानमंत्री आबी अहमद ने युवा जनसांख्यिकी को विकास का आधार बताया।
तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भी वृद्धि अकेले पर्याप्त नहीं। 2035 तक अफ्रीका विश्व के युवा श्रमिकों का केंद्र बनेगा। इस डेमोग्राफिक शक्ति का लक्ष्यपूर्ण उपयोग ही खुशहाली लाएगा।
सम्मेलन ने अफ्रीका के भविष्य के लिए ठोस कदमों की नींव रखी।