बांग्लादेश में 13वीं संसदीय वोटिंग का परिणाम आया तो बीएनपी ने बाजी मार ली। पार्टी को इतनी सीटें मिलीं कि नई सरकार उसके नेतृत्व में बनेगी। मगर खुशी के ये पल जमात-ए-इस्लामी के आरोपों से ग्रहण लग गए, जिसने गड़बड़ी और हिंसक घटनाओं का खुलासा किया।
ढाका प्रेस कॉन्फ्रेंस में जमात नेता शफीकुर रहमान ने दावा किया कि शुक्रवार रात से 11 दलीय मोर्चे के सदस्यों के ठिकानों पर देश के विभिन्न भागों में हल्ला बोला गया। अखबार प्रोथोम अलो ने उनकी चेतावनी को प्रमुखता दी कि बिना देरी सुधार न हुआ तो सख्त रुख अपनाया जाएगा।
‘चुनाव नतीजे अगर पारदर्शी हों तो स्वीकार्य होते हैं,’ रहमान बोले, फिर बोले, ‘लेकिन गड़बड़ी से विवाद पैदा होता है। हमारे कार्यकर्ताओं-सहयोगियों पर हमले, लाठियां, घरों में आगजनी जारी है।’
उन्होंने कहा, ‘जिन्हें बहुमत मिला, उनकी शांति बनाए रखना ड्यूटी है। ये हरकतें बंद हों, नहीं तो हमारा जवाब आएगा।’
गुरुवार को वोटिंग के बाद हिंसा भड़की। एक की जान गई, 36 जख्मी। द डेली स्टार के मुताबिक मुंशीगंज सदर में बीएनपी गुटों की भिड़ंत में 30 वर्षीय मोहम्मद जसीम नायब मारा गया।
वे बीएनपी से निष्कासित नेता के निर्दलीय समर्थक थे। दोपहर को हुई मारपीट में सिर पर वार से वे घायल हुए, ढाका अस्पताल में रात तक जान गई। पुलिस बोली, वोट विवाद खूनी खेल बन गया।
बीएनपी सरकार बनाने को तैयार, लेकिन जमात के इल्जाम और मौत-घायल की खबरें देश को तनाव में डाल रही हैं। नई सत्ता को चुनौती मिल चुकी है।