अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन जाने का प्लान फाइनल कर दिया। अप्रैल 2026 में शी जिनपिंग से मिलने का ऐलान किया गया। व्हाइट हाउस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जिनपिंग के सालांत अमेरिकी दौरे का भी जिक्र किया।
“मैं अप्रैल में चीन जाकर शी से मिलूंगा। बेचैन हूं इस मुलाकात के लिए। वे दिसंबर तक आ जाएंगे,” ट्रंप ने कहा।
संबंधों पर उन्होंने भरोसा जताया, “चीन से रिश्ते बेहतरीन। शी के साथ बॉन्ड कमाल का है।”
दौरे की बारीकियां गुप्त रहीं। हाल ही की फोन बातचीत ने माहौल बनाया, जिसमें व्यापार सौदे, रक्षा सहयोग, ताइवान विवाद, यूक्रेन युद्ध, ईरान हालात और ऊर्जा साझेदारी पर गहन चर्चा हुई।
ट्रूथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने कॉल को सकारात्मक बताया। खास तौर पर अमेरिकी तेल-गैस व कृषि निर्यात पर फोकस। चीन की बढ़ी खरीद से अमेरिकी किसानों को राहत।
व्यापारिक टकराव, तकनीकी पाबंदियां और प्रशांत क्षेत्र में जंग जारी। टैरिफ व चिप कंट्रोल विवादास्पद। लेकिन नेताओं की मुलाकातें तनाव कम करने का जरिया बनीं।
भारत की नजर बरकरार। चीन से सीमा तनाव घटा, अमेरिका से सैन्य गठजोड़ मजबूत। दो महाशक्तियों का समीकरण एशिया को प्रभावित करता है। दस सालों से उतार-चढ़ाव चल रहा।
ट्रंप समर्थकों के उलट आलोचक व्यापार असंतुलन पर निशाना साधते हैं। फिर भी, शिखर कूटनीति भविष्य की कुंजी बनी हुई है।