बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पूर्व पीएम शेख हसीना ने 13वें संसदीय चुनाव पर तीखा प्रहार किया। इसे ‘ढोंग’, गैरकानूनी और संविधान-विरोधी बताते हुए उन्होंने जनता से इसे नकारने की अपील की। अवामी लीग के एक्स हैंडल से जारी बयान में महिलाओं व अल्पसंख्यक समुदायों की सराहना की, जिन्होंने इसे बहिष्कृत किया।
यूनुस सरकार के ‘नाटकीय’ चुनाव में अवामी लीग की गैरमौजूदगी ने इसे वोटर रहित बना दिया, लोकतंत्र व संविधान की अवहेलना की। 11 फरवरी शाम से केंद्रों पर हिंसा, गोलीबारी, पैसे बांटना, बैलेट पर नकली मुहरें और परिणामों पर दबाव शुरू। सुबह तक ज्यादातर बूथ सूने, ढाका में शून्य मतदाता।
चुनाव आयोग के अनुसार, 11 बजे तक केवल 14.96% वोटिंग, जो जन-नकार का प्रमाण है। पूर्व में समर्थकों व अल्पसंख्यकों पर अत्याचार चले ताकि मतदान न हो। धमकियों के बावजूद बहिष्कार सफल, वोटर सूचियों में संदिग्ध इजाफा।
अवामी लीग ने ‘फासीवादी यूनुस शासन’ के तख्तापलट, कैदियों की मुक्ति—शिक्षक, पत्रकार, बुद्धिजीवी—, मुकदमों वापसी, गतिविधि प्रतिबंध हटाने और स्वतंत्र चुनाव की मांग दोहराई। यह मांग बांग्लादेश के भविष्य की दिशा तय करेगी।