बांग्लादेश ने गुरुवार को अपने 13वें संसदीय चुनाव के जरिए इतिहास रचा, लेकिन हिंसा और अनियमितताओं ने इसकी चमक फीकी कर दी। 299 निर्वाचन क्षेत्रों में 42,659 मतदान केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा के बीच वोट पड़े। कुल 127 मिलियन से अधिक वोटरों में महिलाओं की संख्या भी लाखों में थी। दोपहर तक 48 फीसदी मतदान हो चुका था।
शेरपुर-3 का चुनाव प्रत्याशी की असामयिक मृत्यु से स्थगित हो गया। वहीं, गोपालगंज व मुंशीगंज में विस्फोटों ने दहशत फैला दी। ढाका-9 से निर्दलीय तस्नीम जारा ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि उनके महिला एजेंट्स को पोलिंग सेंटरों में घुसने नहीं दिया जा रहा। खिलगांव मॉडल कॉलेज में उन्होंने खुद यह देखा।
‘महिलाओं को परेशान किया जा रहा, झूठे बहाने बनाकर रोका जा रहा,’ जारा ने कहा। अधिकारियों पर मनमानी का इल्जाम लगाते हुए उन्होंने बताया कि महिलाओं को निर्देशों के जाल में फंसाया जा रहा। अन्य महिला उम्मीदवारों ने भी धमकियों की शिकायत की।
ये घटनाएं चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाती हैं। बांग्लादेश जैसे युवा लोकतंत्र को इन चुनौतियों से निपटना होगा। नतीजों से पहले जांच जरूरी है ताकि भविष्य सुरक्षित रहे।