पाकिस्तानी सेना द्वारा बलूचिस्तान में हो रही ज्यादतियों ने मानवाधिकार संगठनों को बेचैन कर दिया है। लाहौर की अस्मा जहांगीर कॉन्फ्रेंस में बलूच नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और सियासी हस्तियों ने इस संकट पर खुलकर बोला। स्थानीय मीडिया के अनुसार, Islamabad की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बीवाईसी के सैमी दीन बलूच ने यूएन अधिकारियों से भेंट की, जहां उन्होंने प्रदर्शनों पर रोक, महिलाओं-बच्चों पर अत्याचार और एक्टिविस्टों को निशाना बनाने की पोल खोली। गुलजादी बलूच जैसे मामलों से हालात की भयावहता जाहिर हुई।
यूएन विशेषज्ञों ने चिंता जताई और मुद्दों को आगे बढ़ाने का ऐलान किया। सरदार अख्तर मेंगल ने बलूचिस्तान-पख्तूनख्वा में राजनीति के सिकुड़ने और सुरक्षा बलों के दमन का जिक्र किया।
अब्दुल मलिक बलूच ने चुनाव क्षेत्र से लापता लोगों की व्यथा सुनाई, राजनीतिक वार्ता पर जोर दिया। पूर्व गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह के बयान से गुस्सा भड़का, सैमी दीन समेत प्रदर्शनकारी बाहर निकल गए।
यह कॉन्फ्रेंस बलूचिस्तान के दर्द को उजागर करती है। सैन्य दखल के बजाय संवाद और न्याय ही रास्ता है, वरना तनाव और बढ़ेगा।