अमेरिकी व्हाइट हाउस ने उम्मीद जताई है कि भारत ट्रंप कालीन व्यापार समझौते में किए टैरिफ घटाने के वादों पर अमल करेगा। इसे अमेरिकी कृषि, मजदूर वर्ग और कारोबारियों के हित में सकारात्मक कदम कहा गया।
ट्रंप सरकार ने व्यापार प्रवर्तन को प्राथमिकता दी थी और इस समझौते को ऐतिहासिक बताया। अधिकारीयों का कहना है कि प्रतिबद्धताओं को मापने योग्य कार्रवाइयों में बदलना जरूरी है। उन्होंने कहा, “ट्रंप ने साबित किया कि व्यापार साझेदारों से वादों का पालन सुनिश्चित किया जाता है।”
विशिष्ट टैरिफ लाइनों का खुलासा नहीं हुआ, मगर कृषि क्षेत्र में भारत के उच्च शुल्क अमेरिकी निर्यात को नुकसान पहुंचाते हैं। गैर-टैरिफ बाधाएं जैसे विनियमन व प्रमाणन भी समस्या बने हुए हैं।
भारत को दक्षिणी एशिया व पश्चिमी इंडो-पैसिफिक में महत्वपूर्ण सहयोगी माना जा रहा। व्यापार वृद्धि, तकनीकी साझेदारी व चेन स्थिरता मुख्य लक्ष्य हैं। एक दशक में द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय प्रगति हुई।
समय-समय पर उत्पन्न तनावों को संवाद से सुलझाया गया। टैरिफ कार्यान्वयन से दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत हो सकते हैं।